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भारत ऐसे देशों की सूची में काफी ऊपर आता है जिनमें अनीमिक औरतों और बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा है| असंतुलित आहार, गरीबी और कुपोषण इसके मुख्य कारण हैं | यह और बहुत सी विकलांगताओं को जन्म देता है | इसलिए अब यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि हम आयरन की कमी के मूल कारणों को समझें और बच्चों में इसकी रोकथाम और देखभाल को जानें |

Iron Deficiency in Babies and Kids Symptoms, Prevention, Care anemia kannada hindi

बच्चों में आयरन की कमी | रोकथाम और देखभाल

(इस लेख के अंत में दिए गए विडियो को देखना मत भूलिए)

Iron Deficiency in Babies and Kids Symptoms, Prevention, Care anemia kannada hindi

आयरन क्या है ?

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आयरन एक आवश्यक पोषक तत्त्व है जो कि हर बच्चे की वृद्धि एवं विकास के लिए बेहद ज़रूरी है | हमें आयरन की आवश्यकता हीमोग्लोबिन बनाने के लिए पड़ती है जो कि ऑक्सीजन को फेफड़ों से पूरे शरीर तक पहुंचाता है | अगर आपके बच्चे के खाने में आयरन भरपूर नहीं होगा तो उसे एनीमिया या आयरन की कमी हो सकती है|

एक बच्चे को कितना आयरन चाहिए ?

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पहले छह महीने की उम्र तक स्तनपान करने वाले बच्चों की आयरन की ज़रुरत माँ के दूध से पूरी हो जाती है जबकि बोतल से दूध पीने वाले बच्चों को आयरन-युक्त फार्मूला दूध देना चाहिए| एक बार बच्चा छह महीने का हो जाये और ठोस आहार शुरू कर दे तो हर बच्चे की उम्र के हिसाब से उसकी आयरन की ज़रुरत अलग हो जाती है | नीचे दिए गये टेबल में उम्र के हिसाब से आयरन की आवश्यकता दी गयी है |

AgeIron per Day
0-6 months0.27 mg
7-12 months11 mg
1-3 years7 mg
4-8 years10 mg
9-13 years8 mg
14-18 years - boys11 mg
14-18 years - girls15 mg

  

आयरन की कमी से बच्चों में क्या परेशानियाँ हो सकती हैं ? आयरन की कमी के बच्चों में क्या लक्षण होते हैं ?

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1. ज़र्द (पेल) त्वचा: आयरन की कमी का प्रमुख लक्षण है त्वचा का पीला या फीका या ज़र्द पढ़ जाना आयरन की कमी हमारे शरीर को लाल रक्त कोशिकाएं बनाने से रोकती है जिससे खून का प्रवाह कम  हो जाता है और त्वचा का रंग बदलने लगता है |

2.  वज़न धीरे बढ़ना: आयरन की कमी से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) कम हो जाती है जिसकी वजह से वो जल्दी बीमार पड़ता है | यही वजह है कि बच्चे का वजन धीरे बढ़ता है |

3.  भूख में कमी: आयरन की कमी के बहुत से लक्षण होते हैं जिसमें से एक है भूख में कमी | आयरन एक बहुत ज़रूरी पोषक तत्त्व है जो ऑक्सीजन को फेफड़ों से पूरे शरीर तक पहुंचाता है और मासपेशियों में ऑक्सीजन को बचा के रखता है | आयरन की कमी यानि कम लाल रक्त कोशिकाएं जिससे भूक कम लगती है |

4. बच्चों में चिढ़चिढ़ाहट: जिन बच्चों में आयरन की कमी पायी जाती है वो बाकी बच्चों की अपेक्षा जल्दी थकते हैं, कमजोरी का अनुभव करते हैं और चिढ़चिढ़े रहते हैं | ऐसा लाल रक्त कोशिकाओं की कमी से होता है |

5. पसीना ज्यादा आना : जब शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं कम हो जाती हैं तो पसीना ज्यादा आने लगता है |

6. सही अनुपात में ना बढ़ना: आयरन की कमी वाले बच्चे कम सक्रिय होते हैं और बाकि बच्चों के अनुपात में धीरे बढ़ते हैं | आयरन की कमी नन्हे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को धीमा करती है तथा मासपेशियों को कमज़ोर कर उसकी मोटर स्किल्स को भी धीमा करती है |

7. अजीब भोजन की इच्छा – मिट्टी या चूना खाना: ना खाने वाली चीज़ों को खाने की तीव्र इच्छा जैसे कि चिकनी मिट्टी (क्ले), धूल आयरन की कमी के कारण हो सकती है | इस स्थिति को पिका (pica) कहते हैं | इन असाधारण खाने की इच्छाओं से यह माना जाता है कि हमारा शरीर पोषक तत्व की कमी को पूरा करने की कोशिश कर रहा है |

किनको आयरन की कमी का खतरा ज्यादा होता है ?

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  1. नवजात शिशु जो वक़्त से पहले पैदा हुए या जन्म के समय जिन बच्चों का वजन कम होता है
  2. बच्चे जो डिब्बे वाला दूध पीते हैं जो आयरन युक्त नहीं होता
  3. छह माह से बड़े बच्चे जो स्तनपान तो करते हैं परन्तु आयरन युक्त और कोई ठोस आहार नहीं लेते
  4. आयरन की कमी वाली माँ से जन्मे बच्चे
  5. ऐसे बच्चों को जो नेतृत्व करने के लिए उजागर कर रहे हैं
  6. ऐसे बच्चे जो गाए का दूध सलाह से ज्यादा पीते हैं
  7. किशोरावस्था में लड़कियों में मासिक धर्म के दौरान
  8. चुनिन्दा चीज़ें खाने वाले जो पौष्टिक, नियम से व संतुलित आहार नहीं खाते
  9. शाकाहारी जो आयरन युक्त भोजन नहीं करते
  10. बच्चे जो किसी विशेष शारीरिक ज़रुरत वाले हो या जिन्हें कोई विशेष बीमारी हो जैसे की क्रोनिक इन्फेक्शन अथवा आंत के रोग
  11. तेज़ी से बढ़ते हुए बच्चे
  12. अथ्लीट्स और दौड़ के खिलाड़ी जो अक्सर शारीरिक व्यायाम करते हैं, उनमें आयरन की कमी का खतरा ज्यादा होता है

बच्चों में आयरन की कमी का पता कैसे ?

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अगर आपके बच्चे में आप आयरन की कमी के कुछ भी लक्षण देखें तो अपने डॉक्टर से बात करके निम्न जाँच के ज़रिये इसका पता लगायें :

1. खून में हीमोग्लोबिन स्तर- पहली जाँच जिससे आयरन की कमी का पता चलता है वो है कम्पलीट ब्लड काउंट (CBC). इससे खून में हीमोग्लोबिन के स्तर का पता चलता है |

2. पेरिफेरल स्मीयर टेस्ट फॉर ब्लड – इस जांच से लाल रक्त कोशिकायों, सफ़ेद कोशिकायों और प्लेटलेट्स में असामान्यताओं के बारे में पता चलता है |

क्या मैं अपने बच्चे को आयरन सप्लीमेंट दे सकती हूँ ? क्या मेरे बच्चे को आयरन सप्लीमेंट की ज़रुरत है ?

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अगर आपका बच्चा सम्पूर्ण रूप से स्वस्थ है तो उसे आयरन सप्लीमेंट की आवश्यकता नहीं है | ऐसा देखा गया है किबहुत ज्यादा मात्रा में आयरन भी नुकसान पहुंचाता है | अगर आप अपने बच्चे को आयरन युक्त प्राकृतिक खाना देने के साथ साथ आयरन सप्लीमेंट्स भी देती हैं तो शरीर सप्लीमेंट्स को पहले सोख लेता है | आयरन सप्लीमेंट्स शरीर में जिंक को सोखने नहीं देते और गैस की समस्या जैसे जी मिचलाना, उलटी और कब्ज़ जैसी समस्याओं को उत्पन्न करते है |

आपके बच्चे को आयरन सप्लीमेंट्स नहीं चाहिए अगर :

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· अगर आपका बच्चा सिर्फ स्तनपान करता है तो माँ के दूध में आयरन भरपूर होता है, उसे सप्लीमेंट्स नहीं चाहियें |

· अगर आपका बच्चा फार्मूला दूध पीता है तो उसे आयरन युक्त फार्मूला ढूध में आयरन की मात्रा भरपूर मिल सकती है |

· अगर ठोस आहार शुरू करने के बाद आप अपने बच्चे को आयरन युक्त प्राकृतिक खाना देते हैं |

· अगर आपके बच्चे में अनीमिया या आयरन की कमी के कोई लक्षण नहीं हैं |

किन बच्चों को आयरन सप्लीमेंट्स की आवश्यकता ज्यादातर पड़ती है ?

1.   समय से पहले जन्मे  बच्चे

2.   जो बच्चे एक साल का होने से पहले गाये का दूध पीते हैं

3.   माँ का दूध पीने वाले बच्चे जिन्हें ठोस आहार शुरू होने पर भी आयरन युक्त भोजन नहीं दिया जाता

4.   जिन बच्चों का वजन जन्म के समय कम था

5.   ऐसे बच्चे जिनके जन्म के समय उनकी माँ कुपोषित थीं या फिर मधुमेह या आयरन की कमी की शिकार थीं

6.   ऐसे बच्चे जिन्हें अनीमिया का खतरा रहता है

बच्चों में आयरन की कमी | रोकथाम और देखभाल

अगले लेख में आप आयरन युक्त खाने, सप्लीमेंट्स के प्रकार और  सुरक्षित आयरन सप्लीमेंट्स के बारे में पड़ेंगे

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