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शिशुओं के लिए ठोस आहार शुरू करना एक महत्वापूर्ण अवस्था हैं | हर माता-पिता उत्सुकता से खिलाना चाहतें हैं । पहली बार माता-पिता के लिए बहुत बेचैन और चिंता लाती है। इस लेख में शिशुओं को कब और कैसे ठोस आहार शुरू करने के बारे में और पेश करने के बारे में जानकारी प्राप्त करें |

शिशुओं को ठोस आहार कब दिया जाए ? | Introducing Solids to Babies in Hindi

(अंत में दिए गए विडियो को देखना मत भूलिए )

शिशुओं को 6 महीने के बाद ठोस आहार का परिचय क्यों करना चाहिए?

  1. 6 महीने तक बढ़ते बच्चे के लिए स्तनपान या फॉर्मूला दूध आवश्यक पोषण प्रदान करता है।
  2. शिशु आसानी से निगल नहीं सकते हैं, क्योंकि जीभ को जोर नहीं करपाते है ।
  3. जल्दी ठोस आहार का परिचय करने से मोटापे, एलर्जी, एक्जिमा, मधुमेह इत्यादि कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
  4. केवल 6 महीने के बाद, बच्चे को ढूध के साथ अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है, अधिक लोहा की ज़रूरत होती है ।
  5. भारतीय स्वास्थ्य संगठन IHO और WHO विश्व स्वास्थ्य संगठन भी यही सिफारिश करते हैं।

बच्चा ठोस आहार के लिए तैयार है तो 4 संकेतों को ध्यन से देखिये :

जन्म से लगभग 6 महीने तक माँ का दूध काफी हैं  इसके बाद माँ के दूध के साथ ठोस आहार शुरू करना चाहिए| लेकिन हर बच्चा अलग है, इसलिए जल्दी मत कीजिये और मजबूर न करें।

ध्यान दीजिये इन सूचनाओं पर –

  1. बच्चा आसरे के साथ या खुद ही बैठ सकता है और उसका सर ठीक से कण्ट्रोल में रख पाता है |
  2. खाने में दिल्चापी दिखाते हैं | भोजन के दौरान चबाने को दिखाना |
  3. खाने को अपने हाथ से लेकर मुंह में डालना |
  4. जब बच्चे को भोजन पेश करते हैं तो कुछ खाना निगलें |

ध्यान रखें – Things you should keep in mind

  1. हमेशा बच्चे को बिठाकर खाना खिलाए । बच्चा को लिटा कर न खिलाए |
  2. खाने के दौरान बच्चे को कभी भी अकेला न छोड़ें | घुट (chok) या हिचाकी की संभावनाओं को कम करने के लिए ।
  3. बच्चे को खिलाने के लिए उपयोग करने वाले कटोरे, चम्मच गर्म पानी में अच्छी तरह धोलें
  4. 1 साल तक बच्चे के भोजन में नमक, चीनी या शहद का इस्तेमाल न करें ।
  5. ठोस आहार शुरू करने से पहले अपने बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे महत्वपूर्ण हैं |
  6. कम से कम, एक साल तक स्तनपान या सूत्र शिशुओं का मुख्य भोजन है और उनके स्वस्थ विकास के लिए बहुत अधिक आवश्यक होता है।

ठोस आहार पेश करने के दो तरीके हैं 

  1. पारंपरिक तरीका – Traditional Weaning : ठोस पदार्थों को शुरू करते समय दलिया/ फल/ सब्जी के रस से शुरू करना चाहिए । धीरे-धीरे बाद में विभिन्न बनावट के आहार,हाथ से भोजन को पकड़ कर खाने को धीरे-धीरे पेश करना चाहिए ।
  2. बच्चो का अपने आप खाना – Baby Led Weaning: बच्चे अपने हाथों से खाना खातें हैं । बच्चे को खुद तय करने के लिए छोड़ना – कितना खाना चाहिए, कब खाना चाहिए और कब नहीं। सभी पारिवारिक भोजन बिना नमक और चीनी खातें है । बच्चे को भोजन अधिक पसंद आने की संभावनाएं होती हैं ।

कुछ प्रमुख सूचनाए – Few Do’s and Dont’s

  1. बहुत जल्दी ठोस आहार शुरू मत करें |
  2. अनेक तरह के स्वाद का परिचय दें|
  3. आहार का विभिन्न बनावट और विन्यास का परिचय कर सकतें है  
  4. कभी मजबूर न करें |
  5. एलर्जी होनेवाले आहार देने में देरी की कोई ज़रूरत नहीं है|
  6. बच्चे के संकेतों को ध्यन से समझिए |

बच्चा ठोस आहार को इंकार करें या खाना पसंद न करें तो क्या करना चाहिए ?

चिंता मत करें और कैलेंडर से टिकने की कोई आवश्यकता नहीं है। आप कुछ दिनों या सप्ताह के लिए इंतजार कर सकते हैं और उसके बाद ठोस पदार्थों को फिर से पेश कर सकते हैं। बच्चे के शरीर से बताने का यह एक स्वाभाविक तरीका है कि उसके पाचन तंत्र को अधिक समय चाहिए। मजबूर न करें। कुछ बच्चों को स्व-भोजन में अधिक दिलचस्पी होती है | इसलिए आपने उंगली से खाने को खाना पसंद करतें है – जैसे मुलायम पके हुए सब्जियों, दूध या पानी में भिगोया हुवा रोटी, या किसी नरम भोजन को हाथ में दें सकते हैं और खा सकते हैं।

क्या ठोस पदार्थों को शुरू करने के बाद भी स्तनपान या फार्मूला दूध देना जारी रखना चाहिए?

देना चाहिए | शिशुओं को माँ का दूध या फार्मूला दूध से सभी आवश्यक पोषण प्राप्त होता हैं । माँ के दूध के साथ ठोस आहार एक साल तक उन्हें देना चाहिय । ठोस पदार्थों को शुरू करने के बाद भी आपको स्तनपान / फॉर्मूला ढूध जारी रखना होगा। यह कम नहीं होनी चाहिए।

कुछ लेख पढ़ने के लिए सिफारिश करते हैं:

Video: शिशुओं को ठोस आहार कब दिया जाए ? | Introducing Solids to Babies in Hindi

अगले लेख में, हम बच्चों के लिए ठोस आहार पेश करने के तरीके पर चर्चा करेंगे, इसलिए कृपया देखते रहें। इस लेख को पढ़ने के लिए धन्यवाद। नियमित अपडेट के लिए कृपया हमसे Facebook Page और YouTube Channel से जुड़ें |

अस्वीकरण : इस आलेख में दी गई जानकारी मेरे व्यक्तिगत अनुभव और डॉक्टरों और बाल रोग विशेषज्ञों के साथ किए गए कुछ शोधों के आधार पर हैं। कृपया इसे दिशानिर्देश के रूप में मानें, न कि चिकित्सा सलाह।


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